Banjaara Lyrics/बंजारा लिरिक्स(jise zindagi dhoondh rahi hai)Ek Villain Movie Song

Banjaara lyrics this song from movie Ek Villain sung by Md. Irfan and written by Mithoon and composed by Mithoon.


Song: Banjaara
Singer: Md.Irfan
Lyricist: Mithoon
Music composer: Mithoon
Starring: Sidharth Malhotra,Shradha                                kapoor
Movie: Ek Villain
Year: 2014



बंजारा सांग लिरिक्स हिंदी में


" जिसे ज़िन्दगी ढूंढ रही है, क्या ये वो मकाम मेरा है,
  यहाँ चैन से बस रुक जाऊं, क्यों दिल ये मुझे कहता है,,
  जज्बात नए मिले हैं, जाने क्या असर  ये हुआ है,
इक आस मिली फिर मुझको,जो कबूल किसी ने किया है,

हां किसी शायर की ग़ज़ल,जो दे रूह को शुकून के पल,
कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर,,
मैं मौसम की सेहर, या सर्द में दोपहर,
कोई मुझको यूँ मिला है, जैसे बंजारे को घर,,

जैसे कोई किनारा देता हो सहारा,
मुझे वो मिला किसी मोड़ पर,कोई रात का तारा,
करता हो उजाला वैसे ही रौशन करे वो शहर,,

दर्द मेरे वो भुला ही गया, कुछ ऐसा असर हुआ,         जीना मुझे फिर से वो सिखा रहा,,                                 हम्म जैसे बारिश कर दे तर,या मरहम दर्द पर,
कोई  मुझको यूँ मिला है,जैसे बंजारे को घर,,
मैं मौसम की सेहर, या सर्द में दोपहर,
कोई मुझको यूँ मिला है जैसे बंजारे को घर,,

मुसकाता ये चेहरा, देता है जो पहरा,
जाने छुपाता क्या दिल का समंदर,,
औरों को तो हरदम साया देता है,
वो धूप में है खड़ा खुद मगर,,
चोट लगी है उसे फिर क्यूँ महसूस मुझे हो रहा है,
दिल तू बता दे क्या है इरादा तेरा,,

हम्म.. परिंदा बेसबर था उड़ा जो दर ब दर,
कोई  मुझको यूँ मिला है,जैसे बंजारे को घर,,
मैं मौसम की सेहर, या सर्द में दोपहर,
कोई  मुझको यूँ मिला है,जैसे बंजारे को घर,,
जैसे बंजारे को घर,जैसे बंजारे को घर,
जैसे बंजारे को घर!


Banjaara song Lyrics in English



Jise zindagi dhoondh rahi hai...
Kya ye wo makam mera hai..
Yahan chain se bas ruk jaaun...
Kyon dil ye mujhe kahta hai...
Jajbaat naye mile hain...                           jane  kya asar ye hua hai...
Ik aas mili fir mujhko...
Jo kabool kisi ne kiya hai...

Haan.. kisi shayar ki gajal..
Jo de rooh ko sukun ke pal...
Koi mujhko yun mila hai...
Jaise banjare ko ghar,main mausam ki sehar...
Ya sard mein dopahar...
Koi mujhko yun mila hai...
Jaise banjare ko ghar...

Jaise koi kinara,deta ho sahara...
Mujhe wo mila kisi mod par...
Koi raat ka tara karta ho ujala...
Waise hi rosan kare wo shahar...

Dard mere  wo bhula hi gaya...
Kuchh aisa asar huaa..
Jeena mujhe fir se wo sikha raha...
Hamm jaise barish kar de tar...
Ya marham dard par...
Koi mujhko yun mila hai...
Jaise banjare ko ghar...
Main mausam ki sehar...
Ya sard mein dopahar...
Koi mujhko yun mila hai ...
Jaise banjare ko ghar...

Muskata ye chehra,deta hai jo pahra...
Jaane chhupata kya dil ka samandar...
Auron ko to hardam shaya deta hai...
Wo dhoop mein hai khada khud magar..
Chot lagi hai use fir kyon...
Mehsoos mujhe ho raha hai...
Dil tu bata de kya hai iraada tera....

Hamm parinda besabar...
Tha uda jo dar badar...
Koi mujhko yun mila hai...
Jaise banjare ko ghar...
Main mausam ki sehar...
Ya sard mein dopahar...
Koi mujhko yun mila hai ...
Jaise banjare ko ghar...
Jaise banjare ko ghar...
Jaise banjare ko ghar...
Jaise banjare ko ghar.

বানজারা গানের লিরিক্স বাংলা



যিনি জীবন খুঁজছেন, তিনিই কি এই আমার বাড়ি,

 শুধু এখানে শান্তিতে থামুন, কেন এই হৃদয় আমাকে বলেন,

 আবেগ নতুন, প্রভাব কী তা জানুন,

 আমি আবার আশা পেয়েছি, যা কেউ স্বীকার করেছে,


 হ্যাঁ, একজন কবির গজল, যিনি মুহুর্তের চেতনা দেন,

 কেউ আমাকে বাজনার বাড়ির মতো এটির সন্ধান করেছেন,

 আমি মরসুমের আবহাওয়া, বা শীতের মধ্যাহ্নে,

 কেউ আমাকে বাজনার বাড়ির মতো এটির সন্ধান করেছেন,


 কেউ সমর্থন দেয় যেমন,

 আমি এটি পেয়েছিলাম যে কোনও এক রাতের তারকা,

 শহরটি এরকম আলোকিত করে,


 ব্যথা আমাকে ভুলে গিয়েছিল, এর এমন প্রভাব পড়েছিল, জিনা আবার আমাকে শেখাচ্ছেন, বৃষ্টির মতো হুম, বা ব্যথায় মলম,

 কেউ আমাকে বাজনার বাড়ির মতো এটির সন্ধান করেছেন,

 আমি মরসুমের আবহাওয়া, বা শীতের মধ্যাহ্নে,

 আমি বানজারা বাড়ির মতো কাউকে পেয়েছি,


 এই হাসি মুখটি রক্ষা করে যা দেয়,

 হৃদয় কী লুকায় তা জানুন,

 সর্বদা অন্যদের ছায়া দেয়,

 তিনি রোদে দাঁড়িয়ে, কিন্তু নিজেই

 আমাকে কেন কষ্ট দিচ্ছে তখন আমার মনে হচ্ছে,

 হৃদয়, আপনার উদ্দেশ্য কি আমাকে বলুন


 হুম .. পারিন্দা বেসবারকে রেট দিয়ে উড়িয়ে দেওয়া হয়েছিল,

 কেউ আমাকে বাজনার বাড়ির মতো এটির সন্ধান করেছেন,

 আমি মরসুমের আবহাওয়া, বা শীতের মধ্যাহ্নে,

 কেউ আমাকে বাজনার বাড়ির মতো এটির সন্ধান করেছেন,

 বনজরের বাড়ির মতো, বনজরের বাড়ির মতো,

 বাঞ্জার বাড়ির মতো!
















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